Business Idea – प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकली यह अनोखी बिजनेस कहानी साबित करती है कि सही सोच और नए नजरिए से बड़ी से बड़ी समस्या को भी अवसर में बदला जा सकता है।
आमतौर पर बेरोजगारी, खाली पड़ी जमीन और गंदा पानी जैसे शब्द सुनते ही लोगों के मन में चिंता पैदा हो जाती है। लेकिन अगर यही तीन चीजें मिलकर रोजाना ₹600 से ₹800 तक की कमाई का जरिया बन जाएं, वो भी बिना ज्यादा निवेश के, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता।
दरअसल, इस गांव के लोगों ने इन समस्याओं को कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। उन्होंने एक ऐसा बिजनेस मॉडल तैयार किया, जिसने न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ाई,
बल्कि पूरे गांव की आर्थिक स्थिति भी सुधार दी। आज यह पहल सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई गांवों के लिए प्रेरणा और नई उम्मीद बन चुकी है।
यह कहानी बताती है कि अगर सोच सकारात्मक हो और सही दिशा में मेहनत की जाए, तो साधारण संसाधनों से भी असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है।
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जहां पहले कोई नहीं जाता था, वहीं से निकला नया Business Idea
बुरहानपुर जिले के लोनी गांव में एक ऐसी जगह थी, जहां पूरे गांव का गंदा पानी जमा होता था। दलदल और बदबू से भरी इस जगह की हालत इतनी खराब थी कि लोग वहां से गुजरना भी पसंद नहीं करते थे। लेकिन गांव के ही एक मेहनती युवक हेमंत पाटिल ने इस समस्या में भी एक अवसर देख लिया।
हेमंत ने तय किया कि इस बेकार पड़ी जमीन और गंदे पानी का सही इस्तेमाल करके कुछ नया किया जा सकता है, जो गांव की किस्मत बदल दे।
इसी सोच के साथ उन्होंने यहां कमलगट्टा यानी कमल बीज की खेती शुरू करने का प्लान बनाया। शुरुआत बहुत छोटी थी — सिर्फ ₹500 में बीज खरीदे और उसी गंदे पानी में डाल दिए।
लेकिन इसके बाद जो नतीजे सामने आए, वे किसी चमत्कार से कम नहीं थे। जिस जगह को लोग बेकार समझते थे, वही जगह अब कमाई का मजबूत जरिया बन गई और पूरे गांव के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई।
कमलगट्टा की खेती – एक स्पेशल और फायदे वाला कारोबार
कमलगट्टा, जिसे आम भाषा में कमल के बीज भी कहा जाता है, एक ऐसा बहुपयोगी और मुनाफेदार उत्पाद है जिसकी बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है।
इसका इस्तेमाल पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। साथ ही, इसकी कलम और फूल सजावट के लिए बेचे जाते हैं,
जबकि बीजों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयों और हेल्थ प्रोडक्ट्स में भी किया जाता है। यानी एक ही फसल से कई तरह की कमाई के रास्ते खुल जाते हैं।
सबसे खास बात यह है कि इस खेती के लिए पारंपरिक खेत, महंगे उर्वरक या ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। कमलगट्टा गंदे या रुके हुए पानी में भी आसानी से उग जाता है,
जिससे बेकार पड़ी जमीन और तालाब भी कमाई का जरिया बन सकते हैं। यही वजह है कि कम लागत में शुरू होने वाला यह कारोबार गांव और छोटे क्षेत्रों के लोगों के लिए एक बेहतरीन बिजनेस अवसर साबित हो सकता है।
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आसान और जीरो लागत वाला तरीका
स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक यह बिजनेस आइडिया बेहद आसान और लगभग जीरो लागत में शुरू किया जा सकता है।
इसकी शुरुआत के लिए आपको सिर्फ कुछ कमलगट्टा (कमल बीज) चाहिए, जो ₹500 से भी कम कीमत में आसानी से मिल जाते हैं।
सबसे पहले एक पारदर्शी गिलास या बर्तन में पानी भरकर बीज डालें और उसे धूप वाली जगह पर रख दें। कुछ ही दिनों में बीज अंकुरित होने लगते हैं।
जब बीजों से छोटे-छोटे अंकुर निकल आएं, तो उन्हें किसी गंदे पानी वाली जगह, तालाब या दलदल में रोप दें। खास बात यह है कि इन पौधों को न रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है और न ही बार-बार देखभाल की।
प्राकृतिक तरीके से ही ये तेजी से बढ़ते हैं। करीब 6 से 8 महीनों के भीतर पौधे पूरी तरह तैयार हो जाते हैं और उनमें फूल, पत्ते और बीज आने लगते हैं, जिससे कमाई शुरू हो जाती है।
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फरवरी से अक्टूबर तक है कमलगट्टा खेती का बेस्ट समय
कमलगट्टा यानी कमल बीज की खेती के लिए सबसे उपयुक्त समय फरवरी से अक्टूबर तक का माना जाता है। इस दौरान मौसम न तो ज्यादा ठंडा होता है और न ही बहुत कठोर, जिससे पौधों का अंकुरण और विकास तेजी से होता है।
धूप और हल्की गर्माहट कमल के पौधों को मजबूत बनाने में मदद करती है, इसलिए इस समय शुरू की गई खेती बेहतर परिणाम देती है।
एक बार जब पौधे पूरी तरह तैयार हो जाते हैं, तो उन पर कमल के खूबसूरत फूल और बीज उगने लगते हैं। इन फूलों और कमलगट्टा बीजों की बाजार में अच्छी मांग रहती है,
जिससे इन्हें अच्छे दामों पर आसानी से बेचा जा सकता है। सही समय पर की गई खेती से कम लागत में बढ़िया मुनाफा कमाया जा सकता है।
कमाई का सीधा गणित
लोनी गांव में आज इस आसान Business Idea की मदद से ग्रामीण रोजाना ₹600 से ₹800 तक की कमाई कर रहे हैं। कमल के फूल और बीज दोनों की बाजार में अच्छी मांग रहती है,
क्योंकि इनका उपयोग पूजा-पाठ, आयुर्वेदिक दवाइयों और सजावट में किया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस कमाई के लिए न तो उर्वरक की जरूरत पड़ती है,
न खाद की और न ही जमीन किराए पर लेने की। सिर्फ गंदा या रुका हुआ पानी और थोड़ी सी मेहनत से ही आमदनी शुरू हो जाती है।
अब गांव बना प्रेरणा का केंद्र
जो जगह पहले गंदगी और बदबू के कारण लोगों द्वारा नजरअंदाज की जाती थी, आज वहीं हरियाली और खिले हुए कमल के फूल नजर आते हैं।
इस पहल से न सिर्फ पर्यावरण साफ हुआ है, बल्कि गांव के कई बेरोजगार युवाओं को एक स्थायी और सम्मानजनक रोजगार भी मिला है।
इस मॉडल की सफलता को देखने के लिए आसपास के गांवों से लोग यहां पहुंच रहे हैं। वे खुद देख रहे हैं कि कैसे एक बेकार और छोड़ी हुई जगह आज कमाई का मजबूत जरिया बन गई है।
बर्बादी में भी छिपा है अवसर
इस अनोखे बिजनेस मॉडल ने साबित कर दिया है कि अगर सोच बदल जाए, तो हालात भी बदल सकते हैं। कमलगट्टा की खेती कम खर्च वाली, टिकाऊ और लंबे समय तक आय देने वाली साबित हो रही है।
अब आपकी बारी है। अपने आसपास नजर डालिए अगर कहीं पानी जमा होता है, तो उसे बेकार न समझें। इस आसान बिजनेस आइडिया को अपनाइए और अपनी कमाई की नई कहानी खुद लिखिए।

Payse kamane ka
Abhishek Kumar
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